ग्वालियर बरसग़ीर का एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है जो अपनी मज़हबी, रूहानी और तहज़ीबी रिवायतों के लिए जाना जाता है। इस सरज़मीन ने मुख़्तलिफ़ मज़ाहिब और सिलसिलों के बुज़ुर्गों को जनम दिया जिन्होंने अपनी तालीमात और किरदार से अवाम के दिलों में जगह बनाई। इन्हीं बुज़ुर्गों में एक नुमायां नाम हज़रत बाबा कपूर रहमतुल्लाह अलैह का है, जिनकी ज़ात आज भी अकीदतमंदों के लिए मरकज़-ए-फ़ैज़ है और जिनकी दरगाह पर हर मज़हब के लोग हाज़िर होकर अपनी मुरादें मांगते हैं।
इस्म-ए-गिरामी व तआरुफ़
हज़रत बाबा कपूर रहमतुल्लाह अलैह का अस्ल नाम हज़रत सैय्यद शाह अब्दुल ग़फूर था। आप एक जलीलुल क़द्र सूफ़ी बुज़ुर्ग और साहिब-ए-करामत वली थे। अवाम में आप बाबा कपूर के नाम से मशहूर हुए, और यही नाम आपकी पहचान बन गया। आपका रूहानी ताल्लुक एक अज़ीम सिलसिला-ए-तसव्वुफ़ से था जो आगे चलकर बदीयुद्दीन अहमद क़ुतुबुल मदार जैसे बुलंद पाया बुज़ुर्ग तक पहुंचता है।
विलादत और इब्तिदाई निशानियाँ
आपकी विलादत के साथ ही आसार-ए-विलायत ज़ाहिर होने लगे थे। रिवायत के मुताबिक आप दिन में दूध नहीं पीते थे बल्कि शाम के वक़्त रोज़ा खोलने के बाद ही दूध नोश फ़रमाते थे। बचपन ही से आपकी तवज्जो अक्सर आसमान की तरफ रहती थी, जिसे आम लोग एक मामूली बात समझते थे, मगर अहल-ए-दिल ने इसमें एक ख़ास रूहानी कैफ़ियत को पहचान लिया था और अंदाज़ा लगा लिया था कि यह बच्चा मुस्तक़बिल में एक अज़ीम वली बनेगा।
इल्म व मआरिफ़त की जुस्तजू
हज़रत बाबा कपूर रहमतुल्लाह अलैह ने उलूम-ए-ज़ाहिरी व बातिनी दोनों में महारत हासिल की, मगर इसके बावजूद आपके दिल में अल्लाह तआला के दीदार की शदीद तलब बाक़ी रही। इसी जुस्तजू ने आपको एक कामिल मुर्शिद की तलाश पर आमादा किया। बिलआख़िर आपको हज़रत सैय्यद शाह राजे देहलवी रहमतुल्लाह अलैह की सोहबत नसीब हुई, जिन्होंने आपको बैअत व ख़िलाफ़त से नवाज़ कर रूहानी फ़ैज़ अता फ़रमाया और आपको मंज़िल-ए-मक़सूद तक पहुंचाया।
मुजाहिदा व रियाज़त
मुर्शिद से फ़ैज़ हासिल करने के बाद आपने अपनी ज़िंदगी को सख़्त मुजाहिदा और रियाज़त के लिए वक़्फ़ कर दिया। आप दुनियावी आसाइशों से दूर हो गए, कम ख़ुराक़ी इख़्तियार की और निहायत सादा लिबास पहना। अक्सर आप हालत-ए-जज़्ब व इस्तिग़राक़ में रहते थे। आपकी ज़िंदगी का एक नुमायां पहलू ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ भी था, चुनांचे आप गर्मी की रातों में मसाकीन और ज़रूरतमंदों को पानी पिलाया करते थे, जो आपकी बे-लौस ख़िदमत का रोशन सुबूत है।
ग्वालियर में क़ियाम
आपने अपनी ज़िंदगी का एक बड़ा हिस्सा ग्वालियर के क़ुर्ब व जव़ार में गुज़ारा। यही मुक़ाम आपकी रूहानी सरगर्मियों का मरकज़ बना, जहां से आपने लोगों को फ़ैज़ पहुंचाया। वक़्त के साथ यही जगह आपकी दरगाह की सूरत इख़्तियार कर गई, जो आज भी अकीदतमंदों के लिए रूहानी सुकून का बाइस है।
करामात व वाक़ियात
हज़रत बाबा कपूर रहमतुल्लाह अलैह की हयात-ए-मुबारका करामात से भरपूर है। एक मर्तबा आपने खाने के मुतअल्लिक फ़रमाया कि यह हलाल नहीं, और तहक़ीक़ पर मालूम हुआ कि वाक़ई वह खाना एक ग़ैर दींदार शख़्स की तरफ से आया था। इसी तरह आपकी सबसे मशहूर करामत वह है जब अकबर ने आपको क़ीमती जवाहरात भेजे, मगर आपने उन्हें आग में डाल दिया। बाद में जब वह जवाहरात वापस तलब किए गए तो आपने अपनी गुदड़ी झाड़ी और उसमें से बेशुमार जवाहरात ज़ाहिर हो गए, जिससे लोगों पर आपकी रूहानी अज़मत वाज़ेह हो गई।
मुलाक़ात-ए-अकबर
बादशाह अकबर ने जब आपकी करामात के बारे में सुना तो आप से मुलाक़ात की ख़्वाहिश ज़ाहिर की। यह मुलाक़ात तानसेन के ज़रिए मुमकिन हुई। आपने शर्त रखी कि बादशाह जूतियाँ सर पर रख कर आए, जिसे अकबर ने आज़िज़ी से क़बूल किया। इस वाक़िये का ज़िक्र तारीखी किताब आईन-ए-अकबरी में भी मिलता है, जो आपकी अज़मत की एक अहम दलील है।
अवामी अकीदत व असरात
हज़रत बाबा कपूर रहमतुल्लाह अलैह की दरगाह आज भी लोगों की अकीदत का मरकज़ है। यहां हर मज़हब और हर तबक़े के लोग आते हैं, चादरें चढ़ाते हैं और अपनी मुरादें मांगते हैं। ख़ास तौर पर शादी-बियाह के मौक़ों पर लोग यहां हाज़िरी देते हैं और अपनी ख़ुशियों में बरकत के लिए दुआ करते हैं। यह सिलसिला सदियों से जारी है, जो आपकी मक़बूलियत और रूहानी असर का वाज़ेह सुबूत है।
विसाल
हज़रत बाबा कपूर रहमतुल्लाह अलैह ने 3 ज़िलक़ादा 989 हिजरी को ग्वालियर में विसाल फ़रमाया। आपका मज़ार मुबारक आज भी इसी शहर में मौजूद है, जहां रोज़ाना हज़ारों अकीदतमंद हाज़िर होकर फ़ैज़ हासिल करते हैं।
खुलासा-ए-सीरत
हज़रत बाबा कपूर रहमतुल्लाह अलैह की सीरत एक कामिल सूफ़ी, सच्चे दरवेश और इंसानियत के ख़ादिम की बेहतरीन मिसाल है। आपने अपनी ज़िंदगी के ज़रिये यह सबक़ दिया कि अस्ल कामयाबी दुनियावी दौलत में नहीं बल्कि रूहानियत, आज़िज़ी और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ में है। आपकी तालीमात और करामात आज भी लोगों के दिलों में ईमान और मोहब्बत की रौशनी पैदा करती हैं۔









