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हज़रत शहाबुद्दीन मदारी रहमतुल्लाह अलैह

On: फ़रवरी 22, 2026 4:43 अपराह्न
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हज़रत शहाबुद्दीन मदारी रहमतुल्लाह अलैह

सिलसिला-ए-आलिया मदारिया की रूहानी तारीख़ में कुछ हस्तियाँ ऐसी गुज़री हैं जिनकी ज़िंदगी का बेशतर हिस्सा महवियत, इस्तिग़राक़ और फ़ना-ए-नफ़्स में बसर हुआ। इन्हीं अकाबिर-ए-तरीक़त में हज़रत शहाबुद्दीन अहमद हल्ला-कश रहमतुल्लाह अलैह का नाम निहायत एहतराम से लिया जाता है। आप एक बाकमाल मगर मग़लूबुल-हाल बुज़ुर्ग थे और अपने वक़्त के अज़ीम शैख़, हज़रत अबुल-वक़्त, शैखुल-असर, सैयद शाह नसरुल्लाह कुद्दस अल्लाह सिर्रहुल अज़ीज़ के मुरीद-ए-ख़ास थे।

शजरह-ए-मुरशदिया

हज़रत शहाबुद्दीन अहमद हल्ला-कश रहमतुल्लाह अलैह का शजरह-ए-तरीक़त निहायत बुलंद और मोअतबर है, जो चंद वास्तों से हज़रत उस्वतुल-कामिलीन, सैयद अबू तुराब ख़्वाजा मंसूर कुद्दस सिर्रहुल अज़ीज़ से जा मिलता है, और बिलआख़िर हज़रत सैयद बदिउद्दीन अहमद कुत्बुल मदार ज़िंदा शाह मदार रज़ियल्लाहु तआला अन्हु तक पहुंचता है।

तरतीब-ए-शजरह यूँ है:

हज़रत सैयद शाह नसरुल्लाह कुद्दस अल्लाह सिर्रहुल अज़ीज़
ख़लीफ़ा व जानशीन हज़रत सैयद शाह मुअज़ हसन साजज़ादा
वो हज़रत शाह रहम अल्लाह तबक़ात
वो हज़रत शाह अबुल अला मेहतर महबूब
वो हज़रत शाह अबुल फ़रह मतर मदन
वो हज़रत शाह सुल्तान अहमद
वो हज़रत शाह अला उद्दीन अलाउल हक़
वो हज़रत शाह अब्दुल हक़ फ़िरोज़
वो हज़रत शाह इमादुद्दीन अहमद
वो हज़रत शाह अब्दुल्लाह
वो हज़रत शाह रिज़्क़ुल्लाह
वो हज़रत शाह अबुल ख़ैर दरियानवाल
वो हज़रत उस्वतुल-कामिलीन सैयद अबू तुराब ख़्वाजा मंसूर कुद्दसत असरारहुम
वो हज़रत सैयद बदिउद्दीन अहमद कुत्बुल मदार ज़िंदा शाह मदार रज़ियल्लाहु तआला अन्हु

यह शजरह इस बात की वाज़ेह दलील है कि हज़रत शहाबुद्दीन अहमद रहमतुल्लाह अलैह को निहायत आली नसबत और मज़बूत रूहानी सिलसिला हासिल था।

रूहानी कैफ़ियत व हाल

हज़रत शहाबुद्दीन अहमद हल्ला-कश रहमतुल्लाह अलैह की ज़िंदगी का नमायाँ पहलू आप की शदीद महवियत और इस्तिग़राक़ था। आप अक्सर औक़ात इस क़दर जज़्ब व महवियत में रहते कि:

आँखें बंद होतीं
गर्दन झुकी हुई होती
और आप ज़ाहिरी शऊर से बेनियाज़ बैठे रहते

यह कैफ़ियत महज़ ज़ाहिरी नहीं बल्कि बातिनी सुलूक की इंतिहा की अलामत थी। नमाज़ के औक़ात में जब कोई आप के शाने को हिलाता तो आप हालत-ए-अफ़ाक़ा में आते और फ़ौरन जमाअत में शरीक हो जाया करते थे। इससे ज़ाहिर होता है कि शरीअत की पाबंदी आप के हाल पर ग़ालिब थी।

विसाल

यह साहिब-ए-हाल व जज़्ब बुज़ुर्ग बिलआख़िर अपने रब-ए-हक़ीक़ी से जा मिले।
आप का विसाल 1245h में माह-ए-रमज़ानुल मुबारक की 21वीं तारीख़ को हुआ, जो रहमत व मग़फ़िरत का महीना है।

क़तअ-ए-तारीख़-ए-वफ़ात

शहाबुद्दीन अहमद मर्द-ए-हक़ बीन
सूए दारुल-बक़ा चूँ ज़ीं जहाँ रफ़्त
बगुफ़्ता मिसरा-ए-तारीख़ बा तफ़
शहाबुद्दीन बमुल्क-ए-जाविदाँ रफ़्त

खुलासा

हज़रत शहाबुद्दीन अहमद हल्ला-कश रहमतुल्लाह अलैह उन बुज़ुर्गों में से हैं जिनकी ख़ामोश ज़िंदगी, मुस्तग़रक़ कैफ़ियत और शरीअत से मज़बूत वाबस्तगी अहल-ए-मआरिफ़त के लिए गहरा पैग़ाम रखती है। आप सिलसिला-ए-आलिया मदारिया के उन अहल-ए-हाल औलिया में शामिल हैं जिन का ज़िक्र कम, मगर असर बहुत गहरा है।

माख़ूज़
किताब: सैरुल मदार
मुसन्निफ़: ज़हीर अहमद सहसवानी बदायूनी
सफ़्हा: 144

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