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रमज़ान रहमत व मग़फ़िरत व सब्र का महीना

On: फ़रवरी 27, 2026 1:40 पूर्वाह्न
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रमज़ान रहमत व मग़फ़िरत व सब्र का महीना

इस्लामी साल के बारह महीनों में सिर्फ रमज़ान का महीना है जिसका नाम हमें क़ुरआन करीम में मिलता है अल्लाह तआला का फ़रमान है।
तर्जुमा। माहे रमज़ान वह है नाज़िल फ़रमाया गया जिसमें क़ुरआन रहनुमाई के लिए लोगों की और रौशन दलीलें हैं हिदायत की और हक़ व बातिल में फ़र्क़ करने के लिए फिर जो पाए तुम में से माहे रमज़ान तो ज़रूर रोज़े रखे उसके और जो है बीमार या सफ़र पर तो गिनती पूरी करे दूसरे दिनों में चाहता है अल्लाह तुम्हारे साथ आसानी और नहीं चाहता तुम्हारे साथ दुश्वारी और यह इसलिए कि तुम पूरी कर लो गिनती और यह इसलिए कि तुम बड़ाई बयान करो अल्लाह की उस पर कि उसने हिदायत फ़रमाई तुमको और ताकि तुम शुक्रगुज़ारी करो।
(बसीरतुल ईमान पारा 2 सूरह बक़रह आयत 184)

हुज़ूर नबी करीम ﷺ का वह ख़ुत्बा सुनाता हूँ जिससे हम सब को इस महीने की अज़मत और फ़ज़ीलत का सही अंदाज़ा हो सकता है।

नाज़रीने किराम!
हज़रत सलमान फ़ारसी रज़ियल्लाहु अन्हु बयान करते हैं कि आख़िर शाबान में नबी करीम अलैहिस्सलाम ने सहाबा से ख़िताब करते हुए फ़रमाया।
ऐ लोगो! तुम पर अज़मत वाला महीना साया कर रहा है यह महीना बरकत वाला है, जिसमें एक रात ऐसी है जो हज़ार महीनों से बेहतर है, यह वह महीना है जिसके रोज़े अल्लाह ने फ़र्ज़ किए, और जिसकी रातों का क़ियाम नफ़्ल बनाया, जो इस महीने में किसी नफ़्ली नेकी से अल्लाह का क़ुर्ब हासिल करना चाहे तो उसे फ़र्ज़ अदा करने के बराबर सवाब मिलेगा। और जो इस महीने में किसी नफ़्ल नेकी से अल्लाह का क़ुर्ब हासिल करना चाहे तो उसे फ़र्ज़ अदा करने के बराबर सवाब मिलेगा और जिसने इस महीने में एक फ़र्ज़ अदा किया तो उसे दूसरे महीनों के सत्तर फ़र्ज़ों के बराबर सवाब मिलेगा। यह सब्र का महीना है और सब्र का सवाब जन्नत है। यह आपस में हमदर्दी का महीना है यह वह महीना है जिसमें मुसलमानों का रिज़्क़ बढ़ा दिया जाता है जो इस महीने में किसी रोज़ेदार को इफ़्तार कराए तो उसके गुनाहों की बख़्शिश होगी और आग से उसकी गर्दन आज़ाद हो जाएगी, और उसको रोज़ेदार का सा सवाब मिलेगा। रोज़ेदार के सवाब में कमी के बग़ैर (हज़रत सलमान फ़रमाते हैं) हमने अर्ज़ किया या रसूलल्लाह! हम में से हर शख़्स के पास रोज़ा इफ़्तार कराने का इंतज़ाम नहीं तो हुज़ूर अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया अल्लाह यह सवाब उस शख़्स को भी देगा, जो दूध के एक घूंट या खजूर, या घूंट भर पानी से किसी को इफ़्तार कराए, और जिसने रोज़ेदार को पेट भर खाना खिलाया अल्लाह उसे क़ियामत के दिन वह पानी पिलाएगा जिसके बाद जन्नत में जाने तक वह कभी प्यासा न होगा। यह वह महीना है जिसके अव्वल में रहमत बीच में बख़्शिश और आख़िर में आग से आज़ादी है और जो इस महीने में अपने ग़ुलाम (मुलाज़िम) से नरमी करेगा तो अल्लाह तआला उसे बख़्श देगा और आग से आज़ाद कर देगा।

नाज़रीने किराम!
हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि व आलेहि वसल्लम का यह ख़ुत्बा रमज़ान की अज़मत और बरकत को समझने के लिए वाज़ेह और काफ़ी है ग़ौर फ़रमाइए, कि आप ने इस महीने के आने की ख़बर देते हुए फ़रमाया कि तुम पर एक अज़ीम महीना साया करने वाला है यानी रमज़ान एक ऐसा साया दार दरख़्त है कि जो मुसलमान भी उसके नीचे, थका, हारा, आता है। उसको यह सुकून बख़्शता है, दुनिया और आख़िरत के अज़ाब से बचा लेता है, हक़ीक़त यही है कि रोज़ा रखने वाला अगर चे, दिन भर भूखा प्यासा रहता है, रात को तरावीह अदा करता है लेकिन उसके बावजूद, उसे एक ख़ास, फ़रहत, सुकून और रूहानी सुरूर हासिल होता है। जैसा कि नबी करीम अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया।
रोज़ेदार को दो खुशियाँ नसीब होती हैं एक तो इफ़्तार के वक़्त और दूसरी अपने रब से मिलते वक़्त नसीब होगी। जब मुसलमान इफ़्तार करता है, तो उसकी खुशी उसके चेहरे से ज़ाहिर होने लगती है सुकून मिलता है, कैसे सुरूर हासिल होता, उसका सही अंदाज़ा सिर्फ रोज़ेदार ही को होता है। रोज़ा पूरा होने और इस अज़ीम इबादत के अदा करने में कामयाबी पर खुशी से दिल झूम उठता है।

और दूसरी खुशी जो ख़ुदा के दरबार में हाज़िरी के वक़्त नसीब होगी, उसको हम अपने लफ़्ज़ों में कैसे बयान कर सकते। बस अल्लाह हमारे रोज़े क़बूल करे, तो हमें यक़ीन कि फिर क़ियामत के दिन हमारा रब हम से खुश होकर यही फ़रमाएगा : ऐ बंदे, जो मैंने कहा वह तू ने दुनिया में रज़ा के लिए किया तो अब मैं तुझ से राज़ी हूँ और अब यहाँ जो तू कहेगा वह मैं करूँगा।

हुज़ूर नबी करीम अलैहिस्सलाम ने अपने ख़ुत्बे में हमें बताया कि यह महीना ऐसी रहमतें बरसाता आया है कि इस महीने में एक नफ़्ली नेकी करने वाला इतना सवाब पाता है जितना आम दिनों में फ़र्ज़ अदा करने पर मिलता है और इस महीने में एक फ़र्ज़ इबादत करने वाले को इतना सवाब दिया जाता है जितना आम दिनों में सत्तर फ़र्ज़ अदा करने पर दिया जाता है, पस आज हम जिस क़दर भी ख़ुदा का शुक्र अदा करें कम है कि उसने हमें इतनी उम्र अता फ़रमा दी कि हमें यह महीना नसीब हो गया, अब हम जितना चाहें सवाब बटोर लें और जो चाहें अपने रब से माँग लें कि उसकी रहमत का साया फैला हुआ है, बस उसके नीचे पहुँचने की देर है। हुज़ूर अलैहिस्सलाम के इरशाद के मुताबिक यह मुक़द्दस महीना हमारे अंदर सब्र की क़ुव्वत पैदा करेगा। जो मोमिन कामिल होने की अलामत है और बाहमी हमदर्दी व मोहब्बत का जज़्बा बेदार करेगा। जो मुस्लिम माशरे की ख़ुसूसियत है। इस महीने की बरकत से हमारे रिज़्क़ में फ़राख़ी होगी। पस मुबारक हो कि यह महीना आ गया और ख़ुदा ने हमें यहाँ जमा होने की तौफ़ीक़ बख़्शी देखिए रब करीम के करम के दरवाज़े खुल चुके हैं मेरे आका सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बताते हैं कि जब रमज़ान की पहली रात होती है तो शयातीन और सरकश जिन क़ैद कर दिए जाते हैं, दोज़ख़ के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं कि उनमें से कोई दरवाज़ा नहीं खोला जाता, जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं कि उनमें से कोई दरवाज़ा बंद नहीं किया जाता और ग़ैबी पुकारने वाला पुकारता है कि ऐ भलाई चाहने वाले आ और ऐ बुराई चाहने वाले बाज़ आ जा और अल्लाह की तरफ़ से लोग आग से आज़ाद किए जाते हैं और यह हर रात होता है।

हम यक़ीन करते हैं कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के इरशाद के मुताबिक उस वक़्त से शयातीन और सरकश जिन क़ैद हो चुके हैं, दोज़ख़ के दरवाज़े बंद हैं जन्नत के दरवाज़े खुले हैं। ख़ुदा की तरफ़ से पुकार आ रही है कि झोलियाँ फैलाओ और भर लो, गुनाहों से निजात का एलान हो रहा है, अब नफ़्स पर क़ाबू करना बाक़ी है, जो हमारा काम है। पस आइए अज़्म करें

कि इस मौक़े से पूरा पूरा फ़ायदा हासिल करेंगे रोज़ाना इसी तरह जमा होंगे, पाबंदी से तरावीह अदा करेंगे, रोज़ा रखेंगे ज़्यादा से ज़्यादा नेकियाँ करने की कोशिश करेंगे, अपने अंदर सब्र की क़ुव्वत पैदा करेंगे। आपस की कदूरतों और नफ़रतों को मोहब्बत में बदल कर एक दूसरे के लिए ईसार करेंगे, ग़रीबों की हर तरह मदद करेंगे, मुसीबत ज़दा भाइयों को सुकून फ़राहम करेंगे यक़ीन जानिए अगर हम यह अज़्म कर लें तो इस मुक़द्दस महीने का हम पर ऐसा साया होगा कि हमेशा के लिए दुनिया की मुसीबतों और आख़िरत के अज़ाब से निजात पा लेंगे।

अल्लाह हम सब को अमल की तौफ़ीक़ दे
आमीन या रब्बुल आलमीन।

मौलाना राशिद हसन क़दीरी

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